Mohini Mantra for Love Attraction

 

Mohini Mantra for Love Attraction

 

Mohini Mantra for Love Attraction

Mohini Mantra for Love Attraction

 

 

साबर तंत्र में इस साधना को मोहनी जाल के नाम से जाना जाता है | इसका प्रयोग कभी विफल नहीं जाता !इससे जहाँ अपने उच्च अधिकारी को अपने अनुकूल बना सकते हैं | वहीँ अपने आस पास के वातावरण को अपने विरोधी होने से रोक सकते हैं | अपनी झगड़ालू पत्नी या पति को भी अपने वश में कर उसे अनुकूलता दे सकते हैं | कई लोग इस प्रयोग का गलत इस्तेमाल कर लेते हैं | उन्हें यही कहता हूँ कि कोई भी ऐसा कार्य ना करें जो सामाजिक दृष्टि से अनुकूल ना हो | सिर्फ आवश्यकता पड़ने पर ही यह प्रयोग करें | मुझे कई सवाल आये वशीकरण बारे पर मैं ज्यादा करके टाल देता हूँ | यहाँ भी यह प्रयोग जिज्ञाशा के लिए दे रहा हूँ | इसलिए इसे सद्कार्य हेतु इस्तेमाल करें नहीं तो शक्ति कई बार विपरीत स्थिति भी पैदा कर देती है | मैंने काफी समय पहले साबर शिव तंत्र पढ़ा था | उसमें यह प्रयोग दिया था | इसे अनुभूत किया | यह घर से भी साध्य व्यक्ति को बुला लेता है | ऐसा परखा हुआ है | मोहनी जाल फेंकना आसान है, मगर उठाना उतना ही मुश्किल | इसलिए इसे इस्तेमाल करने से पहले पुनः सोच विचार कर लें | इस का प्रयोग अति शक्तिशाली है | इससे अपने प्रतिदुंदियों को अपने अनुकूल कर मनचाहा कार्य संपन्न करा सकते हैं | यह प्रयोग पहली बार आपके समक्ष ला रहा हूँ |

साधना विधि
१. इसे लाल वस्त्र धारण कर करना चाहिए |
२. आसन कुषा का या कम्बल का ले सकते हैं |
३. दिशा उतर रहेगी |
४. मन्त्र जाप पाँच माला करना है | इसके लिए लाल चन्दन या कुंकुम की माला या काले हकीक की माला इस्तेमाल कर सकते हैं |
५. तेल का दीपक साधना काल में जलता रहेगा जब तक आप मन्त्र जाप करते हैं | दीपक में तिल का तेल इस्तेमाल करें तो ज्यादा उचित है |
६. सोलह किस्म का सिंगार ले आयें | उसे बाजोट पर लाल वस्त्र बिछा कर उसपर रख दें और सात किस्म की मिठाई भी रख दें | इसके अलावा छोटी इलायची और एक शीशी इतर पास रखें और एक मीठा पान का बीड़ा रख दें |
७. साधना के बाद छोटी इलायची और इतर को छोड़कर शेष सामग्री किसी निर्जन स्थान पर उसी लाल वस्त्र में बांधकर छोड़ दें अथवा नदी में प्रवाहित कर दें |
८. वशीकरण के लिए एक इलायची ७ बार यह मन्त्र पढ़ किसी को खिला दें |
९. जब आप किसी अधिकारी से मिलने जा रहे हों जो आपका कार्य नहीं कर रहा तो थोडा इतर लगाकर चले जाएँ | वो आपकी बात जरुर सुनेगा |
१०. इसे २१ दिन करना है और मन शुद्ध रखें |
११. सारी सामग्री लाल वस्त्र पर रखकर उसमें तेल का दिया किसी पात्र में रख कर लगा दें और मन्त्र जाप शुरू करने से पहले गणेश पूजन, गुरु पूजन और श्री भैरव पूजन अनिवार्य है |
१२. उस दिये पर एक मिटटी के पात्र पर थोडा घी लगाकर दिये से थोड़ा ऊँचा रख सकते हैं काजल उतारने के लिए | उस काजल से तीव्र सम्मोहन होता है | उसे आँखों में लगाकर जिसे भी देखेंगे सम्मोहित हो जायेगा |

boyfriend-vashikaran

साधना करते वक़्त ख्याल रखें , कई बार मोहिनी भयानक रूप में सामने आ जाती है | जिसके काले वस्त्र होते हैं और रंग काला होता है | होठों पर ढेर सारी सुर्खी लगी होती है | आंखे बिजली की तरह चमक रही होती हैं | ऐसी हालत में डरे न , नहीं तो मेहनत बेकार हो जाती है | और ना ही उसकी आंखो में देखने का प्रयत्न करें , नहीं तो आप सम्मोहित हो जायेंगे और साधना रुक जाएगी | बहुत धैर्य से काम लें | जब तक वो वर मांगने को न कहे तब तक बोले नहीं , सिर्फ अपने मंत्र जप पर ध्यान दें | जब आपका वचन हो जाए तो उसे कहें कि जब भी मैं आपको याद कर इस मंत्र का जप कर जिसे सम्मोहित करना चाहूं कर सकूं, आप ऐसा वर दें | इससे सम्मोहन की शक्ति आपको दे देगी | उसे श्रृंगार, मिठाई, पान आदि प्रदान करें | वो खुश होकर आपको सकल सम्मोहन का वचन दे देगी अगर ऐसा न भी हो तो भी मंत्र सिद्ध हो जाता है और कार्य करने लगता है | ऐसा सिर्फ इसलिए लिखा है कि मेरा ऐसा अनुभव है | जो मैं समझता हूँ किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है | पर अक्सर मंत्र सिद्ध हो जाता है और कार्य करने लगता है | साधना के बाद आप इसके प्रयोग की पुष्टि कर सकते हैं | भूल कर भी गलत कार्यों में इसका इस्तेमाल न करें | इसका कई बार विपरीत परिणाम भी भुगतना पड़ सकता है |

|| साबर मंत्र ||
मोहिनी मोहिनी मैं करा मोहिनी मेरा नाम |
राजा मोहा प्रजा मोहा मोहा शहर ग्राम ||
त्रिंजन बैठी नार मोहा चोंके बैठी को |
सत्तर बहतर जिस गली मैं जावा सौ मित्र सौ वैरी को ||
वाजे मन्त्र फुरे वाचा |
देखा महा मोहिनी तेरे इल्म का तमाशा ||

|| Sabar Mantra ||
mohini mohini main kra mohini mera naam |
raja moha parja moha moha shahar gram ||
trinjan baithi naar moha chonke baithi ko |
70-72 jis gali main lulaaa 100 mitr 100 vairi ko ||
vaje mantr fure vacha |
dekha mha mohini tere ilam ka tamasha ||


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Why do we blow the conch?

Why do we blow the conch?

 

Why do we blow the conch

Why do we blow the conch

When the conch is blown, the primordial sound of Om emanates. Om is an auspicious sound that was chanted by the Lord before creating the world. It represents the world and the Truth behind it.

As the story goes, the demon Shankhaasura defeated devas, the Vedas and went to the bottom of the ocean. The devas appealed to Lord Vishnu for help. He incarnated as Matsya Avataara – the “fish incarnation” and killed Shankhaasura. The Lord blew the conch-shaped bone of his ear and head. The Om sound emanated, from which emerged the Vedas.

All knowledge enshrined in the Vedas is an elaboration of Om. The conch therefore is known as shankha after Shankaasua. The conch blown by the Lord is called Paanchajanya. He carries it at all times in one of His four hands.

It represents dharma or righteousness that is one of the four goals (purushaarthas) of life. The sound of the conch is thus also the victory call of good over evil.

Another well-known purpose of blowing the conch and the instruments, known traditionally to produce auspicious sounds is to drown or mask negative comments or noises that may disturb or upset the atmosphere or the minds of worshippers.

Ancient India lived in her villages. Each village was presided over by a primary temple and several small ones. During the aarati performed after all-important poojas and on sacred occasions, the conch used to be blown. Since villages were generally small, the sound of the conch would be heard all over the village. People who could not make it to the temple were reminded to stop whatever they were doing, at least for a few seconds, and mentally bow to the Lord. The conch sound served to briefly elevate people’s minds to a prayerful attitude even in the middle of their busy daily routine.

The conch is placed at the altar in temples and homes next to the Lord as a symbol of Naada Brahma (Truth), the Vedas, Om, dharma, victory and auspiciousness. It is often used to offer devotees thirtha (sanctified water) to raise their minds to the highest Truth. It is worshipped with the following verse.

blow_conch_krishna_arjun

blow_conch_krishna_arjun

Twam puraa saagarot pannaha

Vishnunaa vidhrutahakare

Devaischa poojitha sarvahi

Panchjanya namostu te

Salutations to Panchajanya the conch born of the ocean Held in the hand of Lord Vishnu and worshipped by all devaas

Goddess Lakshmi Mantra to Overcome Poverty and to Become Rich

Goddess Lakshmi Mantra to Overcome Poverty and to Become Rich 

 

 

 

Emergence of Lakshmi

Lakshmi is the Hindu Goddess who governs all form of wealth and success and the paths, means and results of all forms of prosperity. As the Consort of Lord Vishnu, who is the god of preservation, Lakshmi Devi is the goddess of health and beauty. Sri Lakshmi embodies sublime beauty, siddhi, peace, strength, balance, auspiciousness, opulence and wisdom.

Goddess Lakshmi Mantra to Overcome Poverty and to Become Rich

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Lakshmi’s Incarnation into being
The story of Lakshmi’s birth begins when the Devas (minor gods) were in a race against the Asuras (demons) to obtain amrit (the nectar of immorality). The Devas consulted Vishnu who was on earth as Kurma, a tortoise. They decided they would churn the oceans for the amrit. They created to churn by the threading the serpent Vasuki around Mount Mandara. Kurma dived to the ocean floor and balanced Mount Mandara on his back.

In the grip of Kurma’s cosmic clutch, the mountain could not sink into the ocean bed. The gods churned and received the Nectar of Immortality from Lakshmi Devi and then fourteen treasures came to their hands. Lakshmi Chose Vishnu as Her Consort. Vishnu carried Lakshmi from the ocean into His heaven. Each time Vishnu descends on earth as an avatar. He is accompanied by an avatar of Lakshmi.

Meaning of Lakshmi
As a female counterpart of Lord Vishnu, Mata Lakshmi is also called “Shri”, the female of the Supreme Being. Goddess Lakshmi means “Good Luck” to Hindus. The word “Lakshmi” is derived from the Sanskrit word “Laksya”, meaning ‘aim’ or ‘goal’, and she is the goddess of wealth and prosperity, both material and spiritual. Also ‘lakh’ which means “one hundred thousand’ as a monetary unit in India, is the first part of Lakshmi’s name, symbolizing her blessings that pour forth abundantly.