Shukla Paksha & Krishna Paksha differentiation

शुक्ल पक्ष/ कृष्ण पक्ष

Shukla Paksha & Krishna Paksha differentiation 

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एक चन्द्र मास को 30 तिथियों में बांटा गया है। फिर एक चन्द्र मास को दो चरण में भी बांटा गया है, जिसके एक भाग को हम पक्ष कहते हैं-

 

  1. शुक्ल पक्ष
  2. कृष्ण पक्ष
  • अमावस्या और पूर्णिमा के मध्य के चरण को हम शुक्ल पक्ष कहते हैं।
  • अमावस्या के बाद चन्द्रमा की कलाएँ जब बढ़नी आरम्भ हो जाती हैं तब इसे शुक्ल पक्ष कहा जाता है। इन रातों को चाँदनी रातें कहा जाता है। किसी भी शुभ कर्म में शुक्ल पक्ष को शुभ माना जाता है।
  • इन दोनों पक्षो की अपनी अलग आध्यात्मिक विशेषता होती है।
  • शुक्ल पक्ष को सुदी भी कहा जाता है।
  • नये कार्य की शुरुआत तथा व्यवसाय के विस्तार के लिए शुक्ल पक्ष उपयुक्त होता है।

Understanding the differences between Shukla and Krishna pakshas – basic explanation and differentiation of pakshas, and their auspiciousness.

Shukla Paksha & Krishna Paksha differentiation

Shukla Paksha & Krishna Paksha differentiation

 

Which one is auspicious? Which not?

Generally, people consider Shukla paksh as auspicious and Krishna paksha as inauspicious. Obviously, this consideration is due to the energy and brightness of the moon.

But as per the Astrology, the period from the 10th day of Shukla paksha to the 5th day of Krishna paksha is considered astrologically auspicious. In this period of time, the energy of the moon is maximum or nearly maximum – that plays an important role in Astrology to decide good (shubham) and bad or inauspicious (ashubh) days.

 

Each and everyone of us look for auspicious days (शुभ मुहूर्त) to do special things like declaring marriage date, naming your new born baby, buying car, etc.

If we talk about Hindu religions, Shukla paksha (शुक्ल पक्ष) and Krishna paksha (कृष्ण पक्ष) mean a lot in the context of Shubh Muhurt. What is the theory behind these two pakshas? How can one choose ashubh day between these two periods? Lets get to know the answer of these questions.

The Moon revolves around the earth. The time it takes for one complete revolution is called as a Lunar month (चन्द्र मास). The Lunar month, in general, is of 29 days, 12 hours, and 44 minutes.

What is a Paksha?

Each Lunar month is divided into two pakshas. A paksha is a lunar fortnight, or a period of approximately 14 days. As most of the Hindi speaking people know, the literal meaning of the work ‘Paksha’ is side. A paksha in the context of this article means a side of a month – either on the Shukla’s side or the Krishna’s.

Shukla Paksha & Krishna Paksha differentiation

If we know the meaning of the Sanskrit words Shukla and Krishna, we can easily differentiate between the two pakshas. Shukla means bright, whereas Krishna stands for dark.

A Shukla paksha is from the new moon (Amavasya) to the full moon (Poornima). Whereas, Krishna paksha, opposite of the Shukla paksha, starts from the full moon to new moon. In short, Shukla paksha is the period of bright or waxing moon; whereas Krishna paksha is the time when moon fades.


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According to Feng Shui if you have this plant in your house your home will be filled with positive energy. This famous plant has the power which will bring you and your family great wealth. A lot of people in the world are Feng Shui practitioners and they are confirming that this plant in a magnet for money and will make your life much more easier and wealthy.

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Do you want to know which plant this is?

It is Crassula. This plant does not require much attention so you don’t have to be afraid that you won’t have the time to take care of it. At first you won’t need a big pot for the plant but if you put the plant in a big pot the plant will have a place where to grow and spread it’s energy. According to Feng Shui you need to place this plant on the right side of the entrance in the most northern part of the house.

Despite the fact that Crassula is being linked to prosperity and fortune, there is also a belief that this plant contains ethereal oils that have positive effects on both mental and physical energy.

We recommend you to try this and to take care of this plant cause it’s sure that the plant will take care of your fortune and well being.

rassula ovata or Jade plant is a succelent native of South Africa.They are also know as money tree,friendship tree or lucky plant.The leaves of this plant store water and develop tinges of red color on exposure to sunlight.They are excellent bonsai plant and can grow in shallow pots.Keeping this plant indoor is considered auspicious. They can be easily propagated from stem or leaves.

Gayatri Mantra – Maha Mantra for All Problems

जीवन में किसी भी समस्या से परेशान हैं तो करें गायत्री मंत्र का जाप, जरूर होगा लाभ

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हिंदू धर्म में मां गायत्री को वेदमाता कहा जाता है अर्थात सभी वेदों की उत्पत्ति इन्हीं से हुई है। गायत्री को भारतीय संस्कृति की जननी भी कहा जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मां गायत्री का अवतरण माना जाता है। इस दिन को हम गायत्री जयंती के रूप में मनाते है। इस बार गायत्री जयंती का पर्व 28 मई, 2015 (गुरुवार) को है।मां गायत्री को हमारे वेद शास्त्रों में वेदमाता कहा गया है। नाम, दौलत और रूतबा पाना है तो अपनाइये यह फेंगशुई टिप्स धर्म ग्रंथों में यह भी लिखा है कि गायत्री उपासना करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा उसे कभी किसी वस्तु की कमी नहीं होती। गायत्री से आयु, प्राण, प्रजा, पशु, कीर्ति, धन एवं ब्रह्मवर्चस के सात प्रतिफल अथर्ववेद में बताए गए हैं, जो विधिपूर्वक उपासना करने वाले हर साधक को निश्चित ही प्राप्त होते हैं। विधिपूर्वक की गयी उपासना साधक के चारों ओर एक रक्षा कवच का निर्माण करती है व विपत्तियों के समय उसकी रक्षा करती है।
मां गायत्री को पंचमुखी माना गया है हिंदू धर्म में मां गायत्री को पंचमुखी माना गया है जिसका अर्थ है यह संपूर्ण ब्रह्माण्ड जल, वायु, पृथ्वी, तेज और आकाश के पांच तत्वों से बना है। संसार में जितने भी प्राणी हैं, उनका शरीर भी इन्हीं पांच तत्वों से बना है। इस पृथ्वी पर प्रत्येक जीव के भीतर गायत्री प्राण-शक्ति के रूप में विद्यमान है। यही कारण है गायत्री को सभी शक्तियों का आधार माना गया है इसीलिए भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर प्राणी को प्रतिदिन गायत्री उपासना अवश्य करनी चाहिए।
विद्या और तप गायत्री साधक के रूप में सामान्य जन को अमृत,पारस,कल्पवृक्ष रूपी लाभ सुनिश्चित रूप से आज भी मिल सकते है, पर उसके लिए पहले ब्राह्मण बनना होगा। गुरुवर के शब्दों में ” ब्राह्मण की पूँजी है- विद्या और तप। अपरिग्रही ही वास्तव में सच्चा ब्राह्मण बनकर गायत्री की समस्त सिद्धियों का स्वामी बन सकता है, जिसे ब्रह्मवर्चस के रूप में प्रतिपादित किया गया है।”

 

गायत्री पूजा से लाभ युगऋषि ने लिखा है कि परब्रह्म निराकार, अव्यक्त है। अपनी जिस अलौकिक शक्ति से वह स्वयं को विराट रूप में व्यक्त करता है, वह गायत्री है। इसी शक्ति के सहारे जीव मायाग्रस्त होकर विचरण करता है और इसी के सहारे माया से मुक्त होकर पुनः परमात्मा तक पहुँचता है।

 

सरल और फलदायी मंत्र गायत्री मंत्र को जगत की आत्मा माने गए साक्षात देवता सूर्य की उपासना के लिए सबसे सरल और फलदायी मंत्र माना गया है. यह मंत्र निरोगी जीवन के साथ-साथ यश, प्रसिद्धि, धन व ऐश्वर्य देने वाली होती है। लेकिन इस मंत्र के साथ कई युक्तियां भी जुड़ी है. अगर आपको गायत्री मंत्र का अधिक लाभ चाहिए तो इसके लिए गायत्री मंत्र की साधना विधि विधान और मन, वचन, कर्म की पवित्रता के साथ जरूरी माना गया है

 

सुख, सफलता व शांति की चाहत वेदमाता मां गायत्री की उपासना 24 देवशक्तियों की भक्ति का फल व कृपा देने वाली भी मानी गई है। इससे सांसारिक जीवन में सुख, सफलता व शांति की चाहत पूरी होती है। खासतौर पर हर सुबह सूर्योदय या ब्रह्ममुहूर्त में गायत्री मंत्र का जप ऐसी ही कामनाओं को पूरा करने में बहुत शुभ व असरदार माना गया है।





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